NCERT Solutions for Class 10 Hindi स्पर्श (भाग-2) गद्य खंड पाठ 12: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (निदा फ़ाज़ली)
1. SEO STRATEGY INTRODUCTION & CHAPTER MASTER OVERVIEW
प्रख्यात शायर और लेखक निदा फ़ाज़ली द्वारा रचित संस्मरणात्मक निबंध ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ सीबीएसई (CBSE) कक्षा 10 हिंदी पाठ्यक्रम ‘ब’ (Course B) की पाठ्यपुस्तक ‘स्पर्श भाग-2’ के गद्य-खंड का अत्यंत संवेदनशील, सामयिक और पर्यावरण-केंद्रित अध्याय है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से इस पाठ से पर्यावरण असंतुलन एवं प्राकृतिक आपदाओं के कारण, मानव और मूक प्राणियों के अंतर्संबंध, सहानुभूति व संवेदनशीलता का ह्रास, तथा मूल्यपरक (Value-Based) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।
इस पाठ में लेखक ने आत्म-निरीक्षण और पौराणिक-ऐतिहासिक दृष्टांतों (सुलेमान/सोलोमन, नूह और लेखक की माँ) के माध्यम से यह दर्शाया है कि किस प्रकार पहले का मनुष्य प्रकृति, पशु-पक्षियों और समूची सृष्टि के दुख-दर्द को अपना समझता था। इसके विपरीत, आधुनिक मानव ने अपने अंधाधुंध स्वार्थ, कंक्रीट के जंगलों के निर्माण और लालच के कारण प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और समुद्र के किनारे अतिक्रमण के कारण बेघर हुए पशु-पक्षी अब त्राहि-त्राहि कर रहे हैं और कुपित प्रकृति सुनामी, भूकंप, तूफ़ान और अत्यधिक गर्मी के रूप में अपना रौद्र प्रतिशोध ले रही है।
परीक्षार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उत्तर लिखते समय ‘पारिस्थितिकीय संतुलन (Ecological Balance)’, ‘सद्भाव एवं सह-अस्तित्व’, ‘संवेदनहीनता’, तथा ‘प्रकृति का रौद्र रूप’ जैसे प्रमुख पारिभाषिक शब्दों को समाहित करें।
मास्टर सारांश सारणी: प्रमुख पात्र, पौराणिक संदर्भ एवं पाठ का संदेश
| पात्र / ऐतिहासिक संदर्भ | घटना / प्रसंग का विवरण | निहित मानवीय व पर्यावरणीय संदेश |
| हज़रत सुलेमान (सोलोमन) | चींटियों की घबराहट सुनकर अपने लश्कर (सेना) को रोकना और चींटियों को अभयदान देना। | शक्तिशाली होने पर भी दुर्बल और मूक जीवों के प्रति करुणा व विनम्रता रखना। |
| पैगंबर नूह (अलफ़ज़ल) | एक घायल ज़ख्मी कुत्ते को दुत्कारने पर कुत्ते का दार्शनिक उत्तर और जीवनभर रोना। | ईश्वर की बनाई किसी भी रचना को तुच्छ न समझना; सभी जीवों में एक ही प्राण हैं। |
| लेखक की माँ का प्रसंग | बिल्ली द्वारा कबूतर का अंडा फूटने पर दूसरा अंडा बचाते हुए उसका टूटना और दिनभर रोज़ा रखना। | अनजाने में हुए जीव-कष्ट के प्रति आत्म-ग्लानि और ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित। |
| समुद्र का रौद्र रूप | बिल्डरों द्वारा समुद्र को पीछे धकेलना और समुद्र द्वारा तीन जहाजों को गेंद की तरह फेंकना। | प्रकृति के साथ खिलवाड़ का भयानक परिणाम; मनुष्य की सीमाओं की चेतावनी। |
| वर्तमान मनुष्य की स्थिति | कबूतरों को भगाने के लिए खिड़की में जाली लगाना और उन्हें बेघर करना। | आधुनिक मानव की चरम संवेदनहीनता, स्वार्थपरता और सह-अस्तित्व की समाप्ति। |
2. NCERT पाठ्यपुस्तक अभ्यास: प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए:
Question 1. बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे? [CBSE 2019, 2023]
Answer:
बिल्डर अपने व्यावसायिक लाभ, स्वार्थ और आबादी के विस्तार के लिए समुद्र के किनारे की ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे थे। वे समुद्र को पीछे धकेलकर उस पर कंक्रीट के बड़े-बड़े बहुमंजिला भवन (बिल्डिंग्स) और सीमेंट की बस्तियाँ बसाना चाहते थे।
Question 2. लेखक का घर किस शहर में था और अब वह कहाँ रहता है?
Answer:
लेखक का पैतृक घर पहले ग्वालियर में था, जहाँ खुला प्राकृतिक वातावरण, दालान और आँगन थे। वर्तमान समय में लेखक मुंबई के उपनगर वर्सोवा में एक फ्लैट (अपार्टमेंट) में रहता है।
Question 3. जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?
Answer:
पहले मनुष्य प्रकृति के खुले आँगन, बड़े-बड़े दालानों और पेड़-पौधों के बीच मिल-जुलकर संयुक्त परिवारों में रहता था। परंतु आधुनिक नगरीकरण और स्वार्थ के कारण आज जीवन डिब्बेनुमा छोटे-छोटे फ्लैटों और एकाकी कमरों में सिमटकर रह गया है।
Question 4. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे? [CBSE 2020]
Answer:
कबूतर के जोड़े ने लेखक के घर के रोशनदान में दो अंडे दिए थे। एक अंडा बिल्ली ने झपटकर तोड़ दिया था और दूसरा अंडा बचाते समय लेखक की माँ के हाथ से फिसलकर टूट गया था। अपने दोनों बच्चों (अंडों) के नष्ट हो जाने के असीम दुख और वियोग के कारण कबूतर व्याकुल होकर फड़फड़ा रहे थे।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए:
Question 5. अरब में लशकर को ‘नूह’ के नाम से क्यों याद किया जाता है? [CBSE 2018, 2022]
Answer:
अरब में पैगंबर ‘अलफ़ज़ल’ को ‘नूह’ के नाम से याद किया जाता है, क्योंकि ‘नूह’ का शाब्दिक अर्थ होता है—’निरंतर विलाप करने वाला’ या ‘रोने वाला’।
एक बार उनके सामने से एक घायल और ज़ख्मी कुत्ता गुज़रा, जिसे उन्होंने घृणावश ‘दूर हट’ कहकर दुत्कार दिया। कुत्ते ने दार्शनिक उत्तर देते हुए कहा कि न तो मैं अपनी मर्जी से कुत्ता बना हूँ और न तुम अपनी पसंद से इंसान बने हो; हम दोनों को बनाने वाला एक ही परमात्मा है। कुत्ते की इस बात से नूह को अपनी भूल और अहंकार का गहरा बोध हुआ और वे जीवनभर उस मूक जीव के प्रति किए गए अपमान के प्रायश्चित में ईश्वर के सामने रोते रहे। इसी करुणा और पश्चाताप के कारण उन्हें ‘नूह’ कहा गया।
Question 6. लेखक की माँ तीसरी मंजिल के रोशनदान में जाली लगाने के बाद भी क्यों दुखी थीं? [CBSE 2020, 2024]
Answer:
लेखक की पत्नी ने कबूतरों द्वारा घर गंदा किए जाने और बार-बार आने-जाने से तंग आकर रोशनदान में लोहे की जाली लगवा दी थी और उनके आने का रास्ता बंद कर दिया था।
लेखक की माँ इसलिए दुखी थीं क्योंकि:
- जाली लग जाने के कारण कबूतर बाहर खिड़की की मुंडेर पर रातभर ठंड और हवा में उदास व असहाय बैठे रहते थे।
- माँ के भीतर यह गहरी संवेदनशीलता थी कि उन्होंने मूक पक्षियों का आशियाना छीनकर उन्हें बेघर और बेसहारा कर दिया है। माँ को पक्षियों की यह बेबसी और मूक पीड़ा अंदर तक कचोटती थी।
Question 7. प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ? [BOARD EXAM FAVORITE / CBSE 2023]
Answer:
मनुष्य द्वारा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जंगलों के विनाश और समुद्र के अतिक्रमण के कारण प्रकृति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। इसके निम्नलिखित विनाशकारी परिणाम सामने आए हैं:
- ऋतु-चक्र में अनिश्चितता: गरमी में अत्यधिक असह्य धूप पड़ना, बेवक्त और अनियंत्रित मूसलाधार बारिश होना तथा सर्दी का चक्र बिगड़ना।
- प्राकृतिक आपदाएँ: भूकंप, चक्रवाती तूफ़ान, सैलाब (बाढ़), और सुनामी जैसी विनाशकारी आपदाओं का निरंतर आना।
- मूक जीवों का विस्थापन: पक्षियों और जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास छिन जाने से उनका शहरों की ओर भागना या विलुप्त होना।
- नई-नई बीमारियाँ: प्रदूषण और पर्यावरण ह्रास के कारण असाध्य रोगों का फैलना।
Question 8. लेखक की माँ सूर्य ढलने के बाद पेड़ों के पत्ते तोड़ने से क्यों मना करती थीं? [CBSE 2021]
Answer:
लेखक की माँ का मानना था कि प्रकृति के कण-कण और सभी पेड़-पौधों में भी जीवन और संवेदना होती है। वे सिखाती थीं कि:
- शाम ढलने पर पेड़ सोते और विश्राम करते हैं; उस समय उनके पत्ते तोड़ने से पेड़ रोते हैं और बद्दुआ (शाप) देते हैं।
- दीया-बत्ती (शाम) के वक्त फूलों को नहीं तोड़ना चाहिए, अन्यथा वे दुखी होते हैं।
- दरिया (नदी) पर जाने पर उसे सलाम करना चाहिए और कुत्तों-मुर्गों को कभी सताना नहीं चाहिए। माँ का यह दृष्टिकोण प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा और अहिंसा का प्रतीक था।
3. भाव एवं आशय स्पष्टीकरण (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
Question 9. निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था। [CBSE 2022, 2024]
Answer:
आशय: प्रकृति (नेचर) अत्यंत उदार, क्षमाशील और पोषक है, परंतु मनुष्य के लालच और दोहन को सहने की भी एक अंतिम सीमा होती है। जब मनुष्य अपनी सीमाओं को लाँघकर प्रकृति का सीना चीरने लगता है, तो प्रकृति का धैर्य टूट जाता है। लेखक 26 जुलाई 2005 को मुंबई (बंबई) में आई प्रलयंकारी सुनामी और बाढ़ का स्मरण कराते हुए कहते हैं कि प्रकृति ने अपने रौद्र क्रोध से पूरे महानगर को पानी में डुबो दिया था। समुद्र ने अपनी छाती पर तैरते तीन बड़े-बड़े पानी के जहाजों को बच्चों की खिलौना गेंद की तरह उठाकर शहर की सड़कों पर फेंक दिया था। यह घटना मानव को यह सबक सिखाती है कि प्रकृति से खिलवाड़ आत्मघाती है।
(ख) जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है, परंतु जब आता है तो संभालना मुश्किल हो जाता है।
Answer:
आशय: लेखक ने यहाँ समुद्र और प्रकृति की तुलना एक गंभीर, धीर और विशाल हृदय वाले महान पुरुष से की है। समुद्र इतना विशाल है कि वह मनुष्य के सैकड़ों अत्याचार और कचरा अपनी छाती में चुपचाप समेटता रहता है। परंतु जब मनुष्य की धृष्टता सीमा पार कर जाती है और वह समुद्र की ज़मीन पर ही कंक्रीट की इमारतें खड़ी करने लगता है, तो समुद्र का क्रोध भड़क उठता है। उस असीम शक्ति के क्रोध को संसार की कोई भी मानवीय तकनीक या विज्ञान संभाल नहीं पाता।
(ग) मिट्टी से मिट्टी मिले, खोके सभी निशान,
किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान? [BOARD EXAM FAVORITE]
Answer:
आशय: निदा फ़ाज़ली के इस दोहे में जीवन का सर्वोच्च दार्शनिक और आध्यात्मिक सत्य छिपा है। इस सृष्टि के समस्त प्राणी (इंसान, पशु, पक्षी, कीट) पंचतत्वों (विशेषकर मिट्टी) से मिलकर बने हैं और मृत्यु के उपरांत सभी का शरीर उसी मिट्टी में विलीन होकर एकाकार हो जाता है। मिट्टी में मिल जाने के बाद यह भेद करना असंभव है कि कौन हिंदू था, कौन मुस्लिम, कौन अमीर था, कौन गरीब, अथवा कौन मनुष्य था और कौन पशु। जब परमपिता परमात्मा ने सबको एक ही मिट्टी से गढ़ा है, तो फिर जीवित रहते हुए जाति, धर्म, प्रजाति और अहंकार के आधार पर भेद-भाव करना सर्वथा निरर्थक और अमानवीय है।
4. भाषा अध्ययन एवं व्यावहारिक व्याकरण
Question 10. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए:
- कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
- उत्तर: कबूतर परेशान थे और वे इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।
- समुद्र के किनारे बस्तियाँ बसने से परिंदे बेघर हो गए। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
- उत्तर: जब समुद्र के किनारे बस्तियाँ बसीं, तब परिंदे बेघर हो गए।
- लेखक की माँ ने पूरा दिन रोज़ा रखकर प्रायश्चित किया। (सरल वाक्य)
- उत्तर: लेखक की माँ ने प्रायश्चित करने के लिए पूरा दिन रोज़ा रखा।
Question 11. पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के अर्थ और विलोम शब्द लिखिए:
| मूल शब्द | मानक हिंदी अर्थ | विलोम शब्द |
| दालान | बरामदा / खुला आँगन | कमरा (कक्ष) |
| सहनशक्ति | बर्दाश्त करने की क्षमता | असहनशीलता |
| मुसीबत | संकट / विपत्ति | राहत / सुख |
| बेघर | बिना घर का / आश्रयहीन | गृहस्थ / सघर |
| नमूना | उदाहरण / मिसाल | — |
| असंतुलन | संतुलन का बिगड़ना | संतुलन |
5. 15 उच्च-स्तरीय बोर्ड परीक्षा मॉडल प्रश्न (CBSE HOTS & FAQs)
Question 1. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Answer:
यह शीर्षक पूर्णतः सटीक, मार्मिक और समकालीन समाज पर तीखा व्यंग्य है। लेखक यह प्रतिपादित करता है कि आज का मनुष्य इतना आत्मकेंद्रित और स्वार्थी हो गया है कि उसे अपने अलावा किसी अन्य प्राणी, पड़ोसी या प्रकृति के दुख-दर्द से कोई सरोकार नहीं रहा। सुलेमान, नूह और लेखक की माँ जैसे संवेदनशील लोग अब दुर्लभ हो गए हैं। अतः यह शीर्षक मानवीय मूल्यों के पतन की ओर सटीक संकेत करता है।
Question 2. सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा और इससे उनके चरित्र की कौन-सी विशेषता उजागर होती है?
Answer:
जब चींटियाँ घोड़ों की टापों की आवाज़ सुनकर भयभीत होकर अपने बिलों की ओर भागने लगीं, तब सुलेमान ने उनसे कहा—”घबराओ नहीं, ईश्वर ने मुझे सबके लिए रहमत (दया) बनाया है, मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।”
इससे सुलेमान के अपार दयाभाव, निरहंकारी स्वभाव, मूक प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता और न्यायप्रियता की विशेषता उजागर होती है।
Question 3. लेखक ने ‘डेरा डालना’ मुहावरे का प्रयोग पाठ में किन संदर्भों में किया है?
Answer:
लेखक ने ‘डेरा डालना’ का प्रयोग दो संदर्भों में किया है:
- मनुष्यों द्वारा: समुद्र को पीछे धकेलकर उस पर कंक्रीट के मकान बनाकर स्थायी रूप से बस जाना।
- पक्षियों द्वारा: जब उनके घोंसले और पेड़ नष्ट हो गए, तो लाचार पक्षियों ने इंसानों के फ्लैटों, छज्जों और रोशनदानों में अपना अस्थायी ठिकाना (डेरा) बना लिया।
Question 4. नूह के प्रसंग से मनुष्य जाति को क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?
Answer:
नूह के प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर की बनाई सृष्टि में कोई भी प्राणी तुच्छ, अपवित्र या घृणा के योग्य नहीं है। बाह्य रूप-रंग और जाति के आधार पर किसी जीव का तिरस्कार करना वस्तुतः उस परमात्मा का तिरस्कार करना है जिसने उसे रचा है।
Question 5. आधुनिक बिल्डरों और प्राचीन शासकों (जैसे सुलेमान) की मानसिकता में क्या मूल अंतर है? [CBSE HOTS]
Answer:
- प्राचीन शासक (सुलेमान): असीम सैन्य शक्ति और वैभव के बावजूद क्षुद्र चींटियों के जीवन और सुरक्षा की चिंता करते थे तथा स्वयं को सबका सेवक मानते थे।
- आधुनिक बिल्डर: केवल व्यक्तिगत आर्थिक लाभ और स्वार्थ के लिए मूक पक्षियों, पेड़ों और समुद्र तक के अस्तित्व को मिटाने पर तुले हैं। उनमें संवेदनशीलता का सर्वथा अभाव है।
Question 6. लेखक की माँ ने कबूतर का अंडा टूटने पर क्या प्रायश्चित किया?
Answer:
लेखक की माँ ने इस अनजाने में हुए पाप की क्षमा माँगने के लिए पूरा दिन निर्जल रोज़ा (उपवास) रखा, दिनभर नमाज़ पढ़कर आँसू बहाए और बार-बार खुदा से उस बेजुबान पक्षी के बच्चे को खोने का गुनाह माफ करने की गिड़गिड़ाकर दुआ माँगी।
Question 7. ‘समुद्र ने अपने गुस्से में तीन जहाजों को कहाँ-कहाँ फेंका था?’
Answer:
क्रोधित समुद्र ने अपनी छाती पर तैरते तीन बड़े जहाजों को उठाकर तीन अलग-अलग दिशाओं में फेंका था:
- पहला जहाज़ वर्ली के समुद्र तट पर आकर औंधे मुँह गिरा।
- दूसरा जहाज़ बांद्रा में कार्टर रोड के सामने चकनाचूर होकर गिरा।
- तीसरा जहाज़ जुहू के समुद्र किनारे सैलानियों के बीच गिरा और फिर चलने योग्य नहीं रहा।
Question 8. कंक्रीट के जंगलों ने पक्षियों के जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है?
Answer:
शहरीकरण और पेड़ों की कटाई से पक्षियों के प्राकृतिक घोंसले और आश्रय स्थल नष्ट हो गए हैं। वे भोजन और बसेरे की तलाश में शहरों में भटकते हैं, जहाँ खिड़कियों पर लगी जालियों और वाहनों के प्रदूषण के कारण वे या तो मर जाते हैं या दूर वीरान क्षेत्रों में पलायन करने को विवश हो जाते हैं।
Question 9. अभिकथन (A) और तर्क (R) आधारित प्रश्न:
अभिकथन (A): लेखक की माँ ने अनजाने में अंडा टूटने पर भी दिनभर रोज़ा रखा।
तर्क (R): माँ मानती थीं कि किसी भी जीव को कष्ट पहुँचाना ईश्वर के समक्ष गंभीर पाप है।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, परंतु R गलत है।
(घ) A गलत है, परंतु R सही है।
Answer:
सही उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
स्पष्टीकरण: माँ की गहरी धार्मिक और मानवीय संवेदना ही उनके प्रायश्चित और रोज़ा रखने का वास्तविक कारण थी।
Question 10. निदा फ़ाज़ली की लेखन शैली की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
- सरल और मुहावरेदार भाषा: उर्दू, फ़ारसी और हिंदी के देशज शब्दों का अत्यंत भावपूर्ण समन्वय।
- दार्शनिक गहराई: जीवन के यथार्थ, लोक-कथाओं और शेरों-शायरी का सहज प्रयोग।
- संवादात्मक एवं व्यंग्यात्मक टोन: मानवीय पाखंड और संवेदनहीनता पर सीधा कटाक्ष।
Question 11. ‘संसार एक परिवार के समान था’—इस कथन का क्या आशय है?
Answer:
इसका आशय यह है कि प्राचीन काल में मनुष्य, पशु-पक्षी, नदी, पहाड़ और पेड़-पौधे सभी एक ही परिवार के अभिन्न अंग माने जाते थे। सभी एक-दूसरे के पूरक थे और कोई किसी के प्राकृतिक अधिकारों का हनन नहीं करता था।
Question 12. पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए इस पाठ से हमें क्या व्यावहारिक सुझाव मिलते हैं?
Answer:
- अंधाधुंध शहरीकरण और वनों की कटाई पर तत्काल कड़ा प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
- समुद्र, नदियों और जल-स्रोतों में कचरा फेंकने और अतिक्रमण करने से बचना चाहिए।
- घरों की छतों और बालकनियों में पक्षियों के लिए दाना-पानी और हरियाली की व्यवस्था करनी चाहिए।
Question 13. मनुष्य को ‘प्रकृति का सबसे बड़ा शत्रु’ क्यों माना जाने लगा है?
Answer:
क्योंकि सृष्टि के सभी प्राणी प्रकृति के नियमों का पालन करते हैं, केवल मनुष्य ही अपने अंतहीन लोभ के कारण प्राकृतिक संसाधनों का क्रूरतापूर्वक दोहन करता है। वह अपने क्षणिक स्वार्थ के लिए समूचे जैव-मंडल (Biosphere) को खतरे में डाल रहा है।
Question 14. केस स्टडी प्रश्न (Case Study Scenario):
एक रेजिडेंशियल सोसाइटी में पेड़ों पर पक्षियों के चहचहाने और गंदगी करने की शिकायत लेकर कुछ निवासी सभी पेड़ों को काटने का प्रस्ताव रखते हैं। दूसरी ओर, पर्यावरण प्रेमी इसका विरोध करते हैं।
निदा फ़ाज़ली के पाठ के आधार पर सोसाइटी प्रबंधन को क्या उचित निर्णय लेना चाहिए?
Answer:
सोसाइटी प्रबंधन को पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पूर्णतः खारिज कर देना चाहिए। ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ सिखाता है कि यह धरती केवल इंसानों की बपौती नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों का भी इस पर बराबर का अधिकार है। पक्षियों के घोंसले उजाड़ना घोर अमानवीयता है। सोसाइटी को स्वच्छता के अन्य उपाय करने चाहिए, न कि मूक जीवों को बेघर करना चाहिए।
Question 15. इस संपूर्ण पाठ का मुख्य और अंतिम संदेश क्या है?
Answer:
इस पाठ का सर्वोच्च संदेश ‘जियो और जीने दो’ तथा ‘सह-अस्तित्व (Co-existence)’ है। मनुष्य को अपनी संकीर्ण स्वार्थपरता त्यागकर प्रकृति और उसके समस्त जीवों के प्रति संवेदनशील, दयालु और कृतज्ञ होना चाहिए, अन्यथा प्रकृति का प्रकोप संपूर्ण मानव सभ्यता को नष्ट कर देगा।
6. CONCLUDING BOARD TOPPER STRATEGY
सीबीएसई कक्षा 10 हिंदी ‘ब’ की बोर्ड परीक्षा में ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ अध्याय से पूर्ण अंक (Full Marks) प्राप्त करने की विशेष युक्तियाँ:
- तीनों ऐतिहासिक उदाहरणों का स्पष्ट ज्ञान: प्रश्नों के उत्तर में सुलेमान (चींटियों का प्रसंग), नूह (घायल कुत्ते का प्रसंग) और माँ (कबूतर के अंडे का प्रसंग) के संदर्भों का सटीक और संक्षिप्त उल्लेख अवश्य करें।
- प्रकृति असंतुलन के बिंदुवार प्रभाव: जब भी पर्यावरण प्रदूषण या असंतुलन का प्रश्न आए, तो उत्तर को गर्मी की अधिकता, बेवक्त बरसात, तूफान-सुनामी और नई बीमारियाँ जैसे उप-बिंदुओं में प्रस्तुत करें और मुख्य शब्दों को रेखांकित (Underline) करें।
- दोहे का संदर्भ: दीर्घ उत्तरीय उत्तर के निष्कर्ष में निदा फ़ाज़ली के दोहे (“मिट्टी से मिट्टी मिले…”) का भावार्थ लिखें, जिससे परीक्षक पर उत्कृष्ट प्रभाव पड़ेगा।
