NCERT Solutions for Class 10 Hindi स्पर्श (भाग-2) गद्य खंड पाठ 9: डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया)
1. SEO STRATEGY INTRODUCTION & CHAPTER MASTER OVERVIEW
सीबीएसई (CBSE) कक्षा 10 हिंदी पाठ्यक्रम ‘ब’ (Course B) की पाठ्यपुस्तक ‘स्पर्श भाग-2’ के गद्य-खंड का नौवां अध्याय ‘डायरी का एक पन्ना’ स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध लेखक सीताराम सेकसरिया द्वारा रचित एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं संस्मरणात्मक दस्तावेज़ है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह पाठ ऐतिहासिक घटनाओं के यथार्थवादी विश्लेषण, आशय स्पष्टीकरण, कलकत्ता (कोलकाता) पर लगे कलंक को धोने के प्रयास, तथा राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं के अप्रतिम योगदान से जुड़े विश्लेषणात्मक व दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है।
यह पाठ मूलतः सीताराम सेकसरिया की व्यक्तिगत डायरी से 26 जनवरी 1931 की ऐतिहासिक प्रविष्टि (तारीख) का सजीव अंश है। ठीक एक वर्ष पूर्व यानी 26 जनवरी 1930 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के आह्वान पर पूरे देश में पहली बार ‘पूर्ण स्वतंत्रता दिवस’ मनाया गया था, परंतु उस समय कलकत्ता में इसका प्रभाव अत्यंत सीमित था। परिणामस्वरूप, कलकत्ता पर यह आरोप (कलंक) मढ़ा गया कि वहाँ आज़ादी के आंदोलन के लिए कोई विशेष कार्य नहीं हो रहा है। 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता के निवासियों, राष्ट्रीय नेताओं (सुभाष चंद्र बोस) और वीरांगना महिलाओं ने संगठित होकर अदम्य साहस का परिचय दिया और भारी दमन के बावजूद उस कलंक को सदा के लिए धो दिया।
इस पाठ की भाषा शैली दैनिक डायरी विधा की है, जिसमें घटना-क्रम का आँखों देखा यथार्थ, समय-सारणी, पुलिसिया दमन और जनता का अभूतपूर्व उत्साह स्वाभाविक और ओजस्वी रूप में प्रस्तुत किया गया है। परीक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा में उत्तर लिखते समय ‘धारा 144 का खुला उल्लंघन’, ‘स्मारक पर ध्वजारोहण’, ‘अभूतपूर्व लाठीचार्ज’, तथा ‘स्त्री-समाज का क्रांतिकारी संगठन’ जैसे मुख्य पारिभाषिक शब्दों को रेखांकित करना चाहिए।
मास्टर सारांश सारणी: ‘डायरी का एक पन्ना’ का ऐतिहासिक घटना-क्रम व मुख्य बिंदु
| समय / घटना का संदर्भ | प्रमुख स्थान | मुख्य नेतृत्वकर्ता / पात्र | ऐतिहासिक विवरण एवं परिणाम |
| प्रातः काल की तैयारियाँ | बड़ाबाज़ार, कलकत्ता | आम नागरिक एवं मारवाड़ी समाज | मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना, प्रचार हेतु ₹2000 खर्च करना, भव्य सजावट। |
| श्रद्धानंद पार्क की सभा | श्रद्धानंद पार्क | पूर्णोदास एवं महिला समिति | सुबह झंडा फहराते ही पुलिस का लाठीचार्ज; पूर्णोदास गिरफ्तार; तारा सुंदरी पार्क में जानकी देवी द्वारा ध्वजारोहण। |
| महिला जुलूस का संचालन | मानिकतल्ला, लालबाज़ार | जानकी देवी, मदालसा, बृजलाल गोयनका | विमल प्रतिभा के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं का जुलूस; पुलिस की लाठियाँ सहकर 105 महिलाओं की गिरफ्तारी। |
| मुख्य सभा (अपराह्न 4:24 बजे) | मॉन्यूमेंट (शहीद मीनार) मैदान | सुभाष चंद्र बोस | पुलिस कमिश्नर की नोटिस और धारा 144 की अवहेलना; पुलिस लाठीचार्ज में क्षितिज चटर्जी का सिर फटना; सुभाष बाबू द्वारा प्रतिज्ञा पाठ। |
| ऐतिहासिक परिणाम | कलकत्ता शहर | संपूर्ण कलकत्ता वासी | 200+ लोग घायल, 105 महिलाएँ बंदी; कलकत्ता पर लगा निष्क्रियता का कलंक पूरी तरह धुला। |
2. NCERT पाठ्यपुस्तक अभ्यास: प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए:
Question 1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं? [CBSE 2019, 2023]
Answer:
26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में ‘स्वतंत्रता दिवस’ को ऐतिहासिक रूप से मनाने के लिए निम्नलिखित तैयारियाँ की गईं:
- शहर के प्रत्येक भाग, विशेषकर बड़ाबाज़ार के अधिकांश मकानों और दुकानों को राष्ट्रीय ध्वज से सजाया गया, जिससे ऐसा लगता था मानो स्वतंत्रता मिल गई हो।
- प्रचार-प्रसार और व्यवस्था के लिए कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ₹2000 एकत्र किए और जगह-जगह पर्चे बाँटे।
- विभिन्न पार्कों और ऐतिहासिक स्थलों पर जुलूस निकालने और ठीक शाम 4:24 बजे मॉन्यूमेंट के नीचे मुख्य सभा करने की पूर्व-योजना बनाई गई।
Question 2. ‘आज जो बात थी वह निराली थी’—किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन निराला है? [CBSE 2020]
Answer:
कलकत्ता शहर का वातावरण उस दिन पूरी तरह बदला हुआ था, जिससे सिद्ध होता था कि दिन निराला था:
- पुलिस कमिश्नर द्वारा धारा 144 और प्रतिबंधात्मक नोटिस जारी करने के बावजूद जनता निर्भीक होकर सड़कों पर उतर आई थी।
- ऐसा अभूतपूर्व दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया था जहाँ सैकड़ों महिलाओं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खुलेआम लाठीचार्ज का सामना किया और स्वेच्छा से गिरफ्तारियाँ दीं।
Question 3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था? [BOARD EXAM FAVORITE / CBSE 2022]
Answer:
दोनों नोटिसों में कानून और राष्ट्र-प्रेम का सीधा टकराव था:
- पुलिस कमिश्नर का नोटिस: इसके अनुसार अमुक-अमुक धारा के तहत किसी भी प्रकार की सभा या जुलूस निकालना कानूनन अपराध घोषित किया गया था और भाग लेने वालों को दोषी माना जाना था।
- कौंसिल (अखिल भारतीय कांग्रेस) का नोटिस: इसके तहत घोषणा की गई थी कि ठीक 4 बजकर 24 मिनट पर मॉन्यूमेंट के नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी, जिसमें सर्वसाधारण की उपस्थिति अनिवार्य थी।
Question 4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
Answer:
धर्मतल्ले के मोड़ पर पुलिस की एक विशाल टुकड़ी ने सुभाष बाबू के नेतृत्व वाले जुलूस को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भीषण और निर्मम लाठीचार्ज शुरू कर दिया। भारी मार और घायलों की चीख-पुकार के कारण जुलूस तितर-बितर हो गया। इसके बावजूद लगभग पचास-साठ महिलाएँ वहीं सड़क पर बैठ गईं, जिन्हें बाद में पुलिस ने लालबाज़ार जेल भेज दिया।
Question 5. डॉ. दासगुप्ता उनकी देख-रेख तथा फोटो क्यों उतरवा रहे थे?
Answer:
डॉ. दासगुप्ता घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करने के साथ-साथ उनके चोटिल अंगों के फोटो इसलिए खिंचवा रहे थे ताकि ब्रिटिश पुलिस की बर्बरता, क्रूरता और अमानवीय लाठीचार्ज के प्रामाणिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकें। इन तस्वीरों को समाचार-पत्रों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित करवाकर ब्रिटिश शासन के काले चेहरे को उजागर करना उद्देश्य था।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए:
Question 6. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी? [CBSE 2020, 2024]
Answer:
सुभाष बाबू के जुलूस और उस दिन के पूरे आंदोलन में स्त्री समाज ने अग्रणी, ऐतिहासिक और क्रांतिकारी भूमिका निभाई:
- मोर्चे की कमान सँभालना: जानकी देवी, मदालसा, विमल प्रतिभा जैसी वीरांगनाओं के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने अलग-अलग स्थानों से विशाल जुलूस निकाले।
- लाठियों का निर्भयता से सामना: पुलिस के भयानक लाठीचार्ज, घुड़सवारों के प्रहार और धक्के सहने के बावजूद महिलाएँ पीछे नहीं हटीं।
- राष्ट्रीय ध्वज फहराना: तारा सुंदरी पार्क और मॉन्यूमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर महिलाओं ने खुलेआम तिरंगा फहराया और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी।
- सामूहिक गिरफ्तारी: उस दिन 105 महिलाओं ने बिना किसी भय के हँसते-हँसते लालबाज़ार जेल में अपनी गिरफ्तारी दी, जिसने कलकत्ता के इतिहास में नया गौरव जोड़ दिया।
Question 7. ‘अखबारों में क्या छपा था?’—इस आधार पर 26 जनवरी 1931 के दिन की महत्ता को स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2018, 2023]
Answer:
अगले दिन के समाचार-पत्रों में कलकत्ता की घटनाओं की विस्तृत रिपोर्टिंग छपी थी, जिससे इस दिन की महत्ता स्पष्ट होती है:
- अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ कि पुलिस कमिश्नर के सख्त प्रतिबंधों और लाठीचार्ज के बावजूद कलकत्ता की जनता ने खुलेआम स्वतंत्रता दिवस मनाया।
- रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की बर्बरता से लगभग 200 से अधिक लोग घायल हुए और 105 महिलाओं सहित सैकड़ों नागरिकों को जेल में ठूँस दिया गया।
- समाचार-पत्रों ने यह स्वीकार किया कि कलकत्ता में इससे पहले कभी इतने व्यापक स्तर पर सार्वजनिक आंदोलन नहीं हुआ था। इसने यह सिद्ध कर दिया कि कलकत्ता राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में किसी भी अन्य राज्य से पीछे नहीं था।
Question 8. ‘कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है’—उस दिन के घटना-क्रम से यह कलंक किस प्रकार धुल गया? [CBSE 2019, 2024 HOTS]
Answer:
26 जनवरी 1930 को जब देश भर में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, तब कलकत्ता की भागीदारी अत्यंत न्यून रही थी, जिसके कारण अन्य प्रांतों के लोग यह आक्षेप लगाते थे कि कलकत्ता में देशभक्ति का अभाव है और आंदोलन का कोई ठोस कार्य नहीं हो रहा है।
परंतु 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता की जनता, मारवाड़ी समाज, युवा वर्ग और विशेष रूप से महिलाओं ने सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर प्राणों की बाज़ी लगा दी। उन्होंने पुलिस की लाठियों, गोलियों और जेल के भय को दरकिनार करते हुए मॉन्यूमेंट के नीचे ध्वज फहराया। 200 से अधिक घायल हुए और सैकड़ों गिरफ्तारियाँ हुईं। इस अप्रतिम त्याग और जन-विद्रोह को देखकर पूरे देश ने माना कि कलकत्ता अब आंदोलन में पूरी तरह सक्रिय है। इस प्रकार कलकत्ता के माथे से अकर्मण्यता का कलंक सदा के लिए धुल गया।
3. भाव एवं आशय स्पष्टीकरण (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
Question 9. निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है, वह आज बहुत अंश में धुल गया।
Answer:
आशय: लेखक सीताराम सेकसरिया इस पंक्ति द्वारा उस ऐतिहासिक दिन की अभूतपूर्व सफलता को रेखांकित करते हैं। ब्रिटिश शासन के कड़े पहरे और कानूनी नोटिसों को तोड़कर जिस तरह हजारों नागरिकों ने लाठियाँ खाईं और जेल जाना स्वीकार किया, वैसा सामूहिक साहस कलकत्ता के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया था। इस घटना ने उन सभी आलोचकों का मुँह बंद कर दिया जो बंगाल और कलकत्ता को निष्क्रिय समझते थे। त्याग और शहादत की इस पराकाष्ठा ने कलकत्ता को राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन की मुख्यधारा में शीर्ष पर स्थापित कर दिया।
(ख) सुभाष बाबू बहुत ज़ोर-ज़ोर से ‘वंदे मातरम्’ बोलते थे। यह आँख से देखा हुआ दृश्य है। पुलिस भयानक रूप से लाठियाँ बरसा रही थी, फिर भी वे आगे ही बढ़ते जा रहे थे।
Answer:
आशय: इस पंक्ति में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अद्वितीय शौर्य, निर्भयता और नेतृत्व-क्षमता का सजीव चित्रण किया गया है। जब पुलिस की लाठियाँ स्वतंत्रता सेनानियों के सिर पर काल बनकर बरस रही थीं, तब भी सुभाष बाबू के मुख से ‘वंदे मातरम्’ का नारा और अधिक प्रचंड वेग से गूँज रहा था। वे बिना किसी शारीरिक रक्षा के, अडिग रहकर केवल अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। यह दृश्य सिद्ध करता है कि एक सच्चे राष्ट्रनायक का साहस गोलियों और लाठियों से कभी नहीं दबाया जा सकता।
4. भाषा अध्ययन एवं व्यावहारिक व्याकरण
Question 10. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कीजिए:
| मूल शब्द | संधि-विच्छेद | संधि का नाम |
| श्रद्धानंद | श्रद्धा + आनंद | दीर्घ स्वर संधि |
| पुनरावृत्ति | पुनः + आवृत्ति | विसर्ग संधि |
| विद्यार्थी | विद्या + अर्थी | दीर्घ स्वर संधि |
| सूर्योदय | सूर्य + उदय | गुण स्वर संधि |
| उल्लंघन | उत् + लंघन | व्यंजन संधि |
Question 11. निम्नलिखित वाक्यों में से मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्य अलग कीजिए:
- वाक्य: जब से कानून बना था, तब से आज तक इतनी बड़ी सभा नहीं हुई थी।
- मुख्य उपवाक्य: तब से आज तक इतनी बड़ी सभा नहीं हुई थी।
- आश्रित उपवाक्य: जब से कानून बना था (क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य)।
- वाक्य: लोगों का ऐसा मानना था कि कलकत्ता में कोई काम नहीं हो रहा है।
- मुख्य उपवाक्य: लोगों का ऐसा मानना था।
- आश्रित उपवाक्य: कि कलकत्ता में कोई काम नहीं हो रहा है (संज्ञा आश्रित उपवाक्य)।
5. 15 उच्च-स्तरीय बोर्ड परीक्षा मॉडल प्रश्न (CBSE HOTS & FAQs)
Question 1. ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ किस विधा में लिखा गया है और इसका क्या ऐतिहासिक महत्त्व है?
Answer:
यह पाठ डायरी विधा में लिखा गया है। इसका ऐतिहासिक महत्त्व यह है कि यह किसी इतिहासकार का बाद में लिखा गया काल्पनिक विश्लेषण नहीं, बल्कि घटना-स्थल पर उपस्थित एक प्रत्यक्षदर्शी स्वतंत्रता सेनानी का प्रामाणिक और तात्कालिक दस्तावेज़ है। यह 1931 के भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कनों और जन-आंदोलन का सीधा साक्ष्य प्रस्तुत करता है।
Question 2. मारवाड़ी समाज ने 26 जनवरी 1931 के आंदोलन को सफल बनाने में क्या योगदान दिया?
Answer:
मारवाड़ी समाज ने तन, मन और धन से आंदोलन का समर्थन किया:
- उन्होंने अपने व्यापारिक केंद्र बड़ाबाज़ार को तिरंगों से भव्य रूप से सजाया।
- आंदोलन के प्रचार और प्रबंधन हेतु ₹2000 की बड़ी धनराशि एकत्र कर प्रदान की।
- समाज के पुरुषों और महिलाओं (जैसे जानकी देवी, मदालसा) ने स्वयं पुलिस की लाठियाँ खाईं और गिरफ्तारियाँ दीं।
Question 3. बृजलाल गोयनका कौन थे और उन्हें किस कारण गिरफ्तार किया गया?
Answer:
बृजलाल गोयनका एक उत्साही स्वतंत्रता सेनानी थे। वे हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लेकर ‘वंदे मातरम्’ बोलते हुए मॉन्यूमेंट की ओर बेतहाशा दौड़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भीषण लाठीचार्ज किया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब वे फिर उठे, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया।
Question 4. ‘खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी’—इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
Answer:
इसका तात्पर्य यह है कि ब्रिटिश पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट रूप से नोटिस निकालकर सभा को गैर-कानूनी घोषित किया था। इसके जवाब में कांग्रेस कौंसिल ने भी सार्वजनिक इश्तिहार निकालकर ठीक उसी स्थान और समय पर सभा करने का खुला सार्वजनिक आह्वान (चैलेंज) किया। दोनों पक्षों की ओर से खुली चुनौती देकर ऐसी ऐतिहासिक सभा पहले कभी नहीं हुई थी।
Question 5. मॉन्यूमेंट के नीचे का दृश्य कैसा था जब सुभाष बाबू वहाँ पहुँचे?
Answer:
जब सुभाष बाबू अपराह्न 4:24 बजे मॉन्यूमेंट पहुँचे, तब वहाँ हजारों की संख्या में देशभक्त जनता एकत्र थी। पुलिस ने पूरे मैदान को घेर रखा था और घुड़सवार गश्त कर रहे थे। सुभाष बाबू के आते ही ‘वंदे मातरम्’ के नारों से आकाश गूँज उठा और पुलिस ने बर्बरता से लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं।
Question 6. मदालसा और जानकी देवी का आंदोलन में क्या विशिष्ट योगदान रहा?
Answer:
मदालसा और जानकी देवी ने महिला शक्ति का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया:
- उन्होंने घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर सैकड़ों महिलाओं के जत्थों का नेतृत्व किया।
- पुलिस के दमन और धक्कों की परवाह किए बिना वे तारा सुंदरी पार्क और लालबाज़ार तक मार्च करती रहीं और अंततः जेल जाना स्वीकार किया।
Question 7. लालबाज़ार के लॉकअप में स्वतंत्रता सेनानियों को किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
Answer:
लालबाज़ार के लॉकअप में जगह की भारी कमी थी। 105 महिलाओं सहित सैकड़ों पुरुषों को अत्यंत संकीर्ण, गंदे और घुटन भरे कमरों में ठूँस दिया गया था। रातभर उन्हें बिना भोजन-पानी और बिना किसी प्राथमिक चिकित्सा के असह्य कष्ट सहने पड़े, परंतु उनके मुख पर क्रांति की मुस्कान थी।
Question 8. क्षितिज चटर्जी के साथ पुलिस ने क्या बर्बरता की?
Answer:
क्षितिज चटर्जी जब राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास कर रहे थे, तब पुलिस ने उनके सिर पर लगातार लाठियों से कई घातक वार किए। उनका सिर बुरी तरह फट गया और वे खून से लथपथ होकर गिर पड़े। इसके बावजूद वे होश में आने तक तिरंगे को थामे रहे।
Question 9. अभिकथन (A) और तर्क (R) आधारित प्रश्न:
अभिकथन (A): 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता की सड़कों पर महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक थी।
तर्क (R): महिलाएँ केवल तमाशबीन बनकर दूर खड़ी थीं और उन्होंने कोई गिरफ्तारी नहीं दी।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, परंतु R गलत है।
(घ) A गलत है, परंतु R सही है।
Answer:
सही उत्तर: (ग) A सही है, परंतु R गलत है।
स्पष्टीकरण: अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि महिलाओं ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। तर्क (R) सर्वथा असत्य है क्योंकि 105 महिलाओं ने स्वयं लाठियाँ खाकर लालबाज़ार जेल में गिरफ्तारियाँ दी थीं।
Question 10. पाठ में वर्णित ‘धर्मतल्ला’ और ‘लालबाज़ार’ का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
Answer:
- धर्मतल्ला का मोड़: वह स्थल जहाँ सुभाष बाबू के मुख्य जुलूस पर पुलिस ने सबसे भीषण लाठीचार्ज किया और जहाँ महिलाएँ धरने पर बैठ गईं।
- लालबाज़ार: ब्रिटिश पुलिस का केंद्रीय मुख्यालय और मुख्य कारागार, जहाँ सभी घायल सेनानियों और 105 महिलाओं को बंदी बनाकर रखा गया था।
Question 11. विमल प्रतिभा के नेतृत्व में निकलने वाले जुलूस की क्या विशेषता थी?
Answer:
विमल प्रतिभा के नेतृत्व में निकला जुलूस पूरी तरह अनुशासित और महिलाओं का एक विशाल जन-सैलाब था। पुलिस के कड़े अवरोधों और घुड़सवारों की घेराबंदी के बावजूद यह जुलूस सीधे पुलिस मुख्यालय (लालबाज़ार) के मुहाने तक पहुँच गया, जिससे ब्रिटिश प्रशासन स्तब्ध रह गया।
Question 12. लेखक सीताराम सेकसरिया ने इस घटना को अपनी डायरी में क्यों दर्ज किया?
Answer:
लेखक स्वयं एक कर्मठ स्वतंत्रता सेनानी थे। वे चाहते थे कि कलकत्ता के नागरिकों के इस अभूतपूर्व त्याग, वीरता और शहादत का इतिहास भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे और लोग यह जान सकें कि स्वतंत्रता कितनी भारी कीमत चुकाकर हासिल की गई थी।
Question 13. ‘स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा’ का वाचन उस दिन क्यों आवश्यक माना गया था?
Answer:
प्रतिज्ञा का वाचन यह सिद्ध करने के लिए आवश्यक था कि भारतीय जनता ब्रिटिश हुकूमत की पराधीनता को किसी भी शर्त पर स्वीकार नहीं करती। यह देशवासियों के पूर्ण स्वराज के अटूट संकल्प और राष्ट्रीय एकता का औपचारिक उद्घोष था।
Question 14. केस स्टडी प्रश्न (Case Study Scenario):
एक इतिहास का शोधार्थी यह दावा करता है कि 1930 के दशक के राष्ट्रीय आंदोलन केवल पुरुषों तक सीमित थे और मध्यम वर्ग ने पुलिस दमन के भय से इनमें भाग नहीं लिया।
‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ के आधार पर इस दावे का तर्कपूर्ण खंडन कीजिए।
Answer:
यह दावा पूर्णतः तथ्यहीन और असत्य है:
- पाठ के अनुसार, 105 महिलाओं ने प्रत्यक्ष रूप से लाठीचार्ज का सामना कर गिरफ्तारियाँ दीं, जो स्त्रियों की सक्रिय भागीदारी को प्रमाणित करता है।
- मारवाड़ी समाज और साधारण मध्यमवर्गीय नागरिकों ने खुलेआम ₹2000 का चंदा दिया, अपने घरों को तिरंगों से सजाया और 200 से अधिक लोगों ने अपने सिर फुड़वाए। अतः यह आंदोलन समाज के हर वर्ग का साझा महा-संग्राम था।
Question 15. इस अध्याय से वर्तमान युवा पीढ़ी को क्या सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है?
Answer:
इस अध्याय से वर्तमान युवा पीढ़ी को यह प्रेरणा मिलती है कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष कर्म और त्याग में प्रकट होती है। जब समाज अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर निस्वार्थ भाव से खड़ा होता है, तो बड़े से बड़े निरंकुश शासन को झुकना पड़ता है। हमें अपने अमर बलिदानियों की इस आज़ादी की रक्षा पूरी निष्ठा से करनी चाहिए।
6. CONCLUDING BOARD TOPPER STRATEGY
सीबीएसई कक्षा 10 हिंदी ‘ब’ की बोर्ड परीक्षा में ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ से पूरे अंक प्राप्त करने की विशेष युक्तियाँ:
- तथ्यात्मक आँकड़ों का सही उल्लेख: उत्तर लिखते समय 26 जनवरी 1931, शाम 4:24 बजे, ₹2000 का चंदा, 200 घायल, तथा 105 महिलाओं की गिरफ्तारी जैसे प्रामाणिक आँकड़ों का उल्लेख करें और मुख्य शब्दों को रेखांकित (Underline) करें।
- प्रमुख व्यक्तियों के नाम: सुभाष चंद्र बोस, जानकी देवी, मदालसा, विमल प्रतिभा, बृजलाल गोयनका और क्षितिज चटर्जी के नामों का संदर्भ उत्तर में अवश्य जोड़ें।
- कलंक और निवारण का संतुलन: जब भी ‘कलकत्ता पर कलंक’ से जुड़ा प्रश्न आए, तो 1930 की असफलता (कलंक) और 1931 का जन-विद्रोह (कलंक का धुलना)—इन दोनों पहलुओं को दो स्पष्ट अनुच्छेदों में प्रस्तुत करें।
